Mangala Geetam Of Sri Jayadev Kabi
| Total Views | 13 Views |
|---|---|
| Author | Shree Jayadev Kavi |
| Publisher | epustakalaya (2026) |
| Categories | Bhajan And Arati |
| Languages | English, Hindi, Nepali, Sanskrit, Tamil, Telugu |
| File Size | 0.70 MB |
Description
मंगल गीतम् श्री जयदेव कवि द्वारा रचित एक मधुर, भक्तिमय और मंगलकारी स्तवन है। इस गीत में भगवान श्रीकृष्ण, श्रीहरि तथा भगवान विष्णु के विभिन्न दिव्य स्वरूपों और लीलाओं का सुंदर एवं भावपूर्ण वर्णन किया गया है। प्रत्येक पद में भगवान की महिमा का गुणगान करते हुए “जय जय देव हरे” का मंगलमय उद्घोष किया गया है। इस मंगल गीत में भगवान श्रीहरि को माता लक्ष्मी के वक्षस्थल पर विराजमान, सुंदर कुण्डल और वनमाला धारण करने वाले, भक्तों के दुःखों का नाश करने वाले तथा संसार के बंधन से मुक्ति प्रदान करने वाले प्रभु के रूप में स्तुति की गई है। भगवान श्रीकृष्ण की कालिय नाग दमन लीला, मधु, मुर और नरकासुर के विनाश तथा गरुड़ पर आरूढ़ दिव्य स्वरूप का भी सुंदर वर्णन मिलता है। गीत के एक पद में भगवान श्रीराम की महिमा का वर्णन करते हुए माता सीता, दूषण के वध और दशमुखी रावण के संहार का स्मरण किया गया है। इस प्रकार यह स्तवन भगवान के विभिन्न अवतारों और दिव्य लीलाओं को एक साथ स्मरण कराने वाला अत्यंत सुंदर भक्तिगीत है। मंगल गीतम् के अंतिम पद में राधा के प्रिय श्रीकृष्ण, हरि, गोविन्द, गोपाल, वसुदेव के पुत्र तथा नन्दलाल का भजन करने का संदेश दिया गया है। भगवान के नाम का स्मरण और कीर्तन मन को शांति, भक्ति और आनंद प्रदान करने वाला माना गया है। यह पुस्तक दैनिक पूजा-पाठ, भजन-कीर्तन, मंदिर आराधना, धार्मिक अनुष्ठान तथा शुभ अवसरों पर पाठ करने के लिए उपयोगी है। संस्कृत मूल पाठ के साथ विभिन्न लिपियों में इसकी प्रस्तुति इसे अनेक पाठकों के लिए उपयोगी बनाती है। इस पुस्तक में संस्कृत, हिन्दी, नेपाली, English, Tamil और Telugu भाषाओं/लिपियों में मंगल गीतम् की सामग्री उपलब्ध है। श्री जयदेव कवि की भक्तिपूर्ण रचना को पढ़ने, गाने और भगवान श्रीहरि का स्मरण करने के इच्छुक पाठकों के लिए यह एक सुंदर धार्मिक संग्रह है।
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