Abhigyan Shakuntala

Abhigyan Shakuntala

Kali Das

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Author Kali Das
Publisher sanskrit documents dot com (2024)
Categories Sanskrit Sahitya
Languages Sanskrit
File Size 0.49 MB
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Description

अभिज्ञान शाकुन्तलम्, जिसे अभिज्ञानशाकुन्तलम् (शकुंतला की पहचान) के नाम से भी जाना जाता है, संस्कृत साहित्य की सबसे प्रसिद्ध और अनुपम कृतियों में से एक है। यह अद्वितीय नाटक महाकवि कालिदास द्वारा रचित है, जो चौथी–पाँचवीं शताब्दी ईसवी में हुए थे। यह रचना शास्त्रीय भारतीय रंगमंच का शिखर मानी जाती है।

यह नाटक राजा दुष्यंत और शकुंतला की हृदयस्पर्शी प्रेम कहानी प्रस्तुत करता है। शकुंतला एक सरल और कोमल स्वभाव की कन्या है, जो ऋषि कण्व के आश्रम में रहती है। दोनों गहरे प्रेम में पड़ जाते हैं और गांधर्व विवाह कर लेते हैं। लेकिन ऋषि दुर्वासा के श्राप के कारण राजा दुष्यंत शकुंतला को पूरी तरह भूल जाते हैं। श्राप का निवारण केवल तभी हो सकता है जब शकुंतला राजा द्वारा दी गई अंगूठी (मुद्रिका) दिखाए। दुर्भाग्यवश, वह अंगूठी नदी में खो जाती है, और जब शकुंतला राजसभा में पहुँचती है तो राजा उसे पहचान नहीं पाते। कई भावनात्मक उतार-चढ़ाव, दिव्य यात्राओं और अंततः अंगूठी मिलने के बाद राजा को अपनी स्मरणशक्ति लौटती है, और वह अपने पुत्र भरत से मिलता है — जिसके नाम पर ही भारतवर्ष का नाम पड़ा।

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