सनातन स्तोत्र एवं ग्रन्थ संग्रह
श्रीगणेश
श्री गणेश

आरती श्री गणेश जी की

Aaratee shree ganesha jee kee
रचयिता: पारंपरिक पाठ संख्या: 22
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॥ आरती श्री गणेश जी की ॥

जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा ।
माता जाकी पारवती पिता महादेवा ॥

एकदन्त दयावन्त चारभुजाधारी ।
माथे पर तिलक सोहे मूसे की सवारी ॥

पान चढ़े फल चढ़े और चढ़े मेवा ।
लड्डुअन का भोग लगे सन्त करें सेवा ॥

अंधे को आँख देत कोढ़िन को काया ।
बाँझन को पुत्र देत निर्धन को माया ॥

सूर श्याम शरण आए सफल कीजे सेवा ।
जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा ॥

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