सनातन स्तोत्र संग्रह
श्रेणी
सनातन देव

सष्टाङ्ग दण्डवत्

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रचयिता: पारंपरिक पाठ संख्या: 1
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ओम् भगवन्नाशयणाभिमतानुरूप स्वरूपरूप गुणविभव ऐश्वर्य शीलादि अनवधिकातिशय असंख्येय कल्याणगुणगणां पद्मवनालयां भगवतीं श्रियं देवीं नित्यानपायिनीं निरवद्यां देवदेवदिव्यमहिषीम् अखिलजगन्मातरम् अस्मन्मातरम् अशरण्यशरण्याम् अनन्यशरण: शरणमहं प्रपद्ये ।।

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