सनातन स्तोत्र संग्रह
Aarati Collection
सनातन देव

॥ हनुमान जी की आरती ॥

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रचयिता: पारंपरिक पाठ संख्या: 4
लिपि छनोट (Select Script): देवनागरी (संस्कृत)
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॥ हनुमान जी की आरती ॥

आरती कीजै हनुमान लला की॥ दुष्ट दलन रघुनाथ कला की ॥ जाके बल से गिरिवर कांपे॥ रोग दोष जाके निकट न झांके ॥ अंजनि पुत्र महाबलदायी ॥ संतान के प्रभु सदा सहाई ॥ दे बीरा रघुनाथ पठाए ॥ लंका जारी सिया सुध लाए॥ लंका सो कोट समुद्र सी खाई ॥ जात पवनसुत बार न लाई ॥ लंका जारी असुर संहारे ॥ सियारामजी के काज संवारे ॥ लक्ष्मण मूर्छित पड़े सकारे॥ आणि संजीवन प्राण उबारे ॥ पैठी पताले तोरि जमकारे॥ अहिरावण की भुजा उखाड़े॥ बाएं भुजा असुर दल मारे॥ दाहिने भुजा संतजन तारे ॥ सुर नर मुनि जन आरती उतारे॥ जै जै जै उचारे॥ कंचन थार कपूर लौ छाई॥ आरती करत अंजना माई ॥ लंकविध्वंस कीन्ह रघुराई॥ तुलसीदास प्रभु कीरति गाई ॥ जो हनुमानजी की आरती गावै ॥ बसी बैकुंठ परमपद पावै ॥ आरती कीजै हनुमान लला की ॥ दुष्ट दलन रघुनाथ कला की ॥

॥ हनुमान जी की आरती ॥

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