सनातन स्तोत्र संग्रह
Devi Parwati
सनातन देव

॥ गौर्यष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् ॥

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रचयिता: पारंपरिक पाठ संख्या: 1
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॥ गौरी अष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् ॥

गौरी गणेशजननी गिरिराजतनूद्भवा। गुहाम्बिका जगन्माता गङ्गाधरकुटुम्बिनी॥ १॥

वीरभद्रप्रसूर्विश्वव्यापिनी विश्वरूपिणी। अष्टमूर्त्यात्मिका कष्टदारिद्र्यशमनी शिवा॥ २॥

शाम्भवी शङ्करी बाला भवानी भद्रदायिनी। माङ्गल्यदायिनी सर्वमङ्गला मञ्जुभाषिणी॥ ३॥

महेश्वरी महामाया मन्त्राराध्या महाबला। हेमाद्रिजा हैमवती पार्वती पापनाशिनी॥ ४॥

नारायणांशजा नित्या निरीशा निर्मलाऽम्बिका। मृडानी मुनिसंसेव्या मानिनी मेनकात्मजा॥ ५॥

कुमारी कन्यका दुर्गा कलिदोषनिषूदिनी। कात्यायनी कृपापूर्णा कल्याणी कमलार्चिता॥६॥

सती सर्वमयी चैव सौभाग्यदा सरस्वती। अमलाऽमरसंसेव्या अन्नपूर्णाऽमृतेश्वरी॥७॥

अखिलागमसंसेव्या सुखसच्चित्सुधारसा। बाल्याराधितभूतेशा भानुकोटिसमद्युतिः॥८॥

हिरण्मयी परा सूक्ष्मा शीतांशुकृतशेखरा। हरिद्राकुङ्कुमाराध्या सर्वकालसुमङ्गली॥९॥

सर्वबोधप्रदा सामशिखा वेदान्तलक्षणा। कर्मब्रह्ममयी कामकलना काङ्क्षितार्थदा॥१०॥

चन्द्रार्कायुतताटङ्का चिदम्बरशरीरिणी। श्रीचक्रवासिनी देवी कला कामेश्वरप्रिया॥११॥

मारारातिप्रियार्धाङ्गी मार्कण्डेयवरप्रदा। पुत्रपौत्रप्रदा पुण्या पुरुषार्थप्रदायिनी॥१२॥

सत्यधर्मरता सर्वसाक्षिणी सर्वरूपिणी। श्यामला बगला चण्डी मातृका भगमालिनी॥१३॥

शूलिनी विरजा स्वाहा स्वधा प्रत्यङ्गिराम्बिका। आर्या दाक्षायणी दीक्षा सर्ववस्तूत्तमोत्तमा॥१४॥

शिवाभिधाना श्रीविद्या प्रणवार्थस्वरूपिणी। ह्रीङ्कारी नादरूपा च त्रिपुरा त्रिगुणेश्वरी॥१५॥

सुन्दरी स्वर्णगौरी च षोडशाक्षरदेवता॥१६॥

॥ इति श्री गौर्यष्टोत्तरशतनामस्तोत्रं सम्पूर्णम् ॥

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