সনাতন দেব
Shrivarah Ashtotarshatnamavali:
Shrivarah Ashtotarshatnamavali:
॥ श्रीवराह अष्टोतरशतनामावलिः ॥
ॐ श्रीवराहाय नम: ॐ महीनाथाय नम: ॐ पूर्णानन्दाय नम: ॐ जगत्पतये नमः ॐ निगुर्णाय नमः ॐ निष्कलाय नमः ॐ अनन्ताय नम: ॐ दण्डकान्तकृते नमः ॐ अव्ययाय नमः ॐ हिरण्याक्षान्तकद्देवाय नम: १० ॐ पूर्णषागण्यविग्रहाय नमः ॐ लयोदधिविहारिणे नम: ॐ सर्वप्राणिहितेरताय नमः ॐ अनन्तरूपाय नम: ॐ अनन्तश्रिये नमः ॐ जितमन्यवे नमः ॐ भयापहाय नम: ॐ वेदान्तवेद्याय नमः ॐ वेदिने नमः ॐ वेदगर्भाय नमः ॐ सनातनाय नम: ॐ सहस्राक्षाय नमः ॐ पुण्यगन्धाय नमः ॐ कल्पकृते नमः ॐ क्षितिभृद्धरये नमः ॐ पद्मनाभाय नमः ॐ स्राध्यक्षाय नमः ॐ हेमाङ्गाय नमः ॐ दक्षिणामुखाय नम: ॐ महाकोलाय नमः ॐ महाबाहवे नमः ॐ सर्वदेवनमस्कृताय नमः ॐ हृषीकेशाय नम: ॐ प्रसन्नात्मने नमः ॐ सर्वभक्तभयापहाय नम: ॐ यज्ञभृते नम: ॐ यज्ञकृते नम: ॐ साक्षिणे नम: ॐ यज्ञाङ्गाय नमः ॐ यज्ञवाहनाय नमः ॐ हव्यभुजे नमः ॐ सदाव्यक्ताय नमः ॐ कृपाकराय नमः ॐ देवभूमिगुरवे नम: ॐ कान्ताय नमः ॐ धर्मगुह्याय नम: ॐ वृषाकपये नम: ॐ स्रुक्तुण्डाय नम: ॐ वक्रदंष्ट्राय नमः ५० ॐ नीलकेशाय नमः ॐ महाबलाय नम: ॐ पूतात्मने नमः ॐ वेदनेत्रे नमः ॐ वेदहर्तृशिरोहराय नम: ॐ वेदादिकृते नम: ॐ वेदगुह्याय नमः ॐ सर्ववेदप्रवर्तकाय नमः ॐ गभीराक्षाय नम: ॐ त्रिधर्मणे नमः ६० ॐ गम्भीरात्मने नम: ॐ महेश्वराय नमः ॐ आनन्दवनगाय नमः ॐ दिव्याय नमः ॐ ब्रह्मणासासमुद्भवाय नम: ॐ हव्यदेवाय नमः ॐ सिन्धुतीरनिवासिने नमः ॐ क्षेमकृते नमः ॐ सात्वतांपतये नमः ॐ इन्द्रत्रात्रे नम: ॐ जगत्त्रात्रे नमः ७० ॐ महेन्द्रोद्दण्डगर्वघ्ने नमः ॐ भक्तवश्याय नमः ॐ सदोद्युक्ताय नमः ॐ निजानन्दाय नम: ॐ रमापतये नम: ॐ स्तुतिप्रियाय नम: ॐ शुभाङ्गाय नम: ॐ पुण्यश्रवणकीर्तनाय नमः ॐ सत्यकृते नम: ॐ सत्यसंकल्पाय नम: ८० ॐ सत्यवाचे नम: ॐ सत्यविक्रमाय नम: ॐ सत्येनगूढाय नम: ॐ सत्यात्मने नमः ॐ कालातीताय नम: ॐ गुणाधिकाय नमः ॐ परस्मैज्योतिषे नमः ॐ परस्मैधाम्ने नम: ॐ परमाय नमः ॐ पुरुषाय नमः ९० ॐ पराय नम: ॐ कल्याणकृते नमः ॐ कवये नम: ॐ कर्त्रे नमः ॐ कर्मसाक्षिणे नम: ॐ जितेन्द्रियाय नम: ॐ कर्मकृते नमः ॐ कर्मकाण्डस्य संप्रदायप्रवर्तकाय नमः ॐ सर्वान्तकाय नमः ॐ सर्वगाय नमः १०० ॐ सर्वार्थाय नम: ॐ सर्वरक्षकाय नमः ॐ सर्वलोकपतये नमः ॐ श्रीमते नमः ॐ श्रीमुष्णेशाय नमः ॐ शुभेक्षणाय नमः ॐ सर्वदेवप्रियाय नमः ॐ साक्षिणे नमः १०८॥ इति श्रीवराह अष्टोतरशतनामावलिः ॥