Purushottam Maas Mahatmya । पुरुषोत्तम मास माहात्म्यम
| Author | — |
|---|---|
| Publisher | Kavikulguru Kalidas Sanskrit University (1915) |
| Categories | Brat And Mahatmyam |
| Languages | Hindi, Sanskrit |
| File Size | 368.62 MB |
| Source / Credit | View Original |
Description
पुरुषोत्तम मास माहात्म्यम् हिन्दू धर्म में अधिक मास (अधिमास) की महिमा का वर्णन करने वाला एक महत्वपूर्ण संस्कृत ग्रन्थ है। इसमें भगवान विष्णु के पुरुषोत्तम स्वरूप, अधिक मास के व्रत, दान, जप, कथा-श्रवण तथा धर्माचरण के फल का विस्तृत वर्णन मिलता है। पुरुषोत्तम मास को भगवान श्रीकृष्ण ने अपना नाम प्रदान किया है, इसलिए यह मास समस्त महीनों में श्रेष्ठ माना गया है। यह ग्रन्थ पुरुषोत्तम मास (अधिक मास) की पौराणिक कथाओं, धार्मिक महिमा तथा आध्यात्मिक महत्व का संग्रह है। इसमें बताया गया है कि किस प्रकार मलमास को भगवान विष्णु ने "पुरुषोत्तम मास" का गौरव प्रदान किया और इस मास में किए गए स्नान, दान, जप, उपवास, भगवद्भक्ति एवं कथा-श्रवण से असंख्य पुण्य प्राप्त होते हैं। ग्रन्थ में ऋषि-मुनियों के संवाद, भक्तों की कथाएँ तथा धर्मपालन से मिलने वाले फल का भी विस्तारपूर्वक वर्णन है। यह दुर्लभ ग्रन्थ महाराष्ट्र के रामटेक स्थित Kavikulguru Kalidas Sanskrit University के संग्रह से प्राप्त हुआ है। यह विश्वविद्यालय संस्कृत अध्ययन, शोध तथा प्राचीन पाण्डुलिपियों के संरक्षण के लिए प्रसिद्ध है।
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