সনাতন স্তোত্র মঞ্জরী
১০৮ নামাভ়লী
সনাতন দেব

॥ শ্রীগণপতি অষ্টোত্তরশতনামাবলিঃ ॥

॥ श्रीगणपति अष्टोत्तरशतनामावलिः ॥
রচয়িতা: পারম্পরিক পাঠ সংখ্যা: 6
লিপি নির্বাচন করুন: देवनागरी (संस्कृत)
23px

गणपति अष्टोत्तरशतनामावलिः

ॐ  गणेश्वराय नमः ॐ  गणक्रीडाय नमः ॐ  महागणपतये नमः ॐ  विश्वकर्त्रे नमः ॐ  विश्वमुखाय नमः ॐ  दुर्जयाय नमः ॐ  धूर्जयाय नमः ॐ  जयाय नमः ॐ  सुरूपाय नमः ॐ  सर्वनेत्राधिवासाय नमः ॐ  वीरासनाश्रयाय नमः ॐ  योगाधिपाय नमः ॐ  तारकस्थाय नमः ॐ  पुरुषाय नमः ॐ  गजकर्णकाय नमः ॐ  चित्राङ्गाय नमः ॐ  श्यामदशनाय नमः ॐ  भालचन्द्राय नमः ॐ  चतुर्भुजाय नमः ॐ  शम्भुतेजसे नमः ॐ  यज्ञकायाय नमः ॐ  सर्वात्मने नमः ॐ  सामबृंहिताय नमः ॐ  कुलाचलांसाय नमः ॐ  व्योमनाभये नमः ॐ  कल्पद्रुमवनालयाय नमः ॐ  निम्ननाभये नमः ॐ  स्थूलकुक्षये नमः ॐ  पीनवक्षसे नमः ॐ  बृहद्भुजाय नमः ॐ  पीनस्कन्धाय नमः ॐ  कम्बुकण्ठाय नमः ॐ  लम्बोष्ठाय नमः ॐ  लम्बनासिकाय नमः ॐ  सर्वायवसम्पूर्णाय नमः ॐ  सर्वलक्षणलक्षिताय नमः ॐ  इक्षुचापधराय नमः ॐ  शूलिने नमः ॐ  कान्तिकन्दलिताश्रयाय नमः ॐ  अक्षमालाधराय नमः ॐ  ज्ञानमुद्रावते नमः ॐ  विजयावहाय नमः ॐ  कामिनीकामनाकाममालिनीकेलिलालिताय नमः ॐ  अमोघसिद्धये नमः ॐ  आधाराय नमः ॐ  आधाराधेयवर्जिताय नमः ॐ  इन्दीवरदलश्यामाय नमः ॐ  इन्दुमण्डलनिर्मलाय नमः ॐ  कर्मसाक्षिणे नमः ॐ  कर्मकर्त्रे नमः ॐ  कर्माकर्मफलप्रदाय नमः ॐ  कमण्डलुधराय नमः ॐ  कल्पाय नमः ॐ  कपर्दिने नमः ॐ  कटिसूत्रभृते नमः ॐ  कारुण्यदेहाय नमः ॐ  कपिलाय नमः ॐ  गुह्यागमनिरूपिताय नमः ॐ  गुहाशयाय नमः ॐ  गुहाब्धिस्थाय नमः ॐ  घटकुम्भाय नमः ॐ  घटोदराय नमः ॐ  पूर्णानन्दाय नमः ॐ  परानन्दाय नमः ॐ  धनदाय नमः ॐ  धरणीधराय नमः ॐ  बृहत्तमाय नमः ॐ  ब्रह्मपराय नमः ॐ  ब्रह्मण्याय नमः ॐ  ब्रह्मवित्प्रियाय नमः ॐ  भव्याय नमः ॐ  भूतालयाय नमः ॐ  भोगदात्रे नमः ॐ  महामनसे नमः ॐ  वरेण्याय नमः ॐ  वामदेवाय नमः ॐ  वन्द्याय नमः ॐ  वज्रनिवारणाय नमः ॐ  विश्वकर्त्रे नमः ॐ  विश्वचक्षुषे नमः ॐ  हवनाय नमः ॐ  हव्यकव्यभुजे नमः ॐ  स्वतन्त्राय नमः ॐ  सत्यसङ्कल्पाय नमः ॐ  सौभाग्यवर्धनाय नमः ॐ  कीर्तिदाय नमः ॐ  शोकहारिणे नमः ॐ  त्रिवर्गफलदायकाय नमः ॐ  चतुर्बाहवे नमः ॐ  चतुर्दन्ताय नमः ॐ  चतुर्थातिथिसम्भवाय नमः ॐ  सहस्रशीर्षे पुरुषाय नमः ॐ  सहस्राक्षाय नमः ॐ  सहस्रपादे नमः ॐ  कामरूपाय नमः ॐ  कामगतये नमः ॐ  द्विरदाय नमः ॐ  द्वीपरक्षकाय नमः ॐ  क्षेत्राधिपाय नमः ॐ  क्षमाभर्त्रे नमः ॐ  लयस्थाय नमः ॐ  लड्डुकप्रियाय नमः ॐ  प्रतिवादिमुखस्तम्भाय नमः ॐ  दुष्टचित्तप्रसादनाय नमः ॐ  भगवते नमः ॐ  भक्तिसुलभाय नमः ॐ  याज्ञिकाय नमः ॐ  याजकप्रियाय नमः

॥ इति श्रीगणेशपुराणे उपासनाखण्डे श्रीगणपत्यष्टोत्तरशतनामावलिः ॥
পাঠ জপ: 0/108