सनातन स्तोत्र एवं ग्रन्थ संग्रह
पूजन विधिः
सनातन देव

कुश अमावस्या की पूजा विधि

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रचयिता: पारंपरिक पाठ संख्या: 13
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कुश अमावस्या की पूजा विधि
सामग्री:
कुश घास, जल (गंगाजल हो तो बेहतर) , पीतल का पात्र (जल भरने के लिए),
धूप, दीपक, तिलक (चंदन, कुमकुम), फूल, अक्षत, पवित्र स्थान (पूजा स्थल), शुद्ध वस्त्र

पूजा विधि:स्नान और शुद्धिकरण:
सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और शुद्ध वस्त्र धारण करें।
पूजा स्थल को साफ कर लें और गंगाजल छिड़क कर पवित्र करें।

कुश का संग्रह:
कुश अमावस्या के दिन, प्रातःकाल में कुश घास को जड़ सहित प्रार्थना कर उखाड़ें।
ॐ पृथ्व्यां जल संभूते कुश नाम्न्यनुकीर्तिते।
सर्वं मङ्गलमावाह्यं सर्वं सौभाग्यमावह॥
कुश को साफ और पवित्र स्थान पर रखें। इसे एक वर्ष तक शुभ कार्यों में उपयोग के लिए संग्रह करें।

पूजा की तैयारी:
पूजा स्थल पर कुश को एकत्रित करें और पीतल के पात्र में जल भरकर रखें।
धूप, दीपक जलाएं और भगवान विष्णु या भगवान शिव की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।

प्रणाम और ध्यान:
बैठकर भगवान का ध्यान करें। तिलक लगाएं और कुश घास को हाथ में लेकर भगवान से प्रार्थना करें कि इससे शुभ कार्यों को पवित्र किया जाए।

कुश की पूजा:
कुश घास को भगवान को अर्पित करें। कुश पर चंदन, अक्षत, और फूल चढ़ाएं।
कुश को गंगाजल से स्नान कराएं और धूप-दीप दिखाएं।

विशेष मंत्र और प्रार्थना:
"ॐ कुशाय नमः" या "ॐ केशवाय नमः" मंत्र का जाप करें। ॐ कुशाय नमः। हे कुश, यत्र यत्र त्वं प्रयुक्त, तत्र तत्र सर्वं मङ्गलमायुः, सुखं समृद्धिम् च प्रददातु।
भगवान से प्रार्थना करें कि यह कुश घास आने वाले वर्ष में सभी शुभ कार्यों में उपयोगी हो और सभी बाधाओं को दूर करे।

समापन:
पूजा के बाद, कुश घास को सावधानीपूर्वक एक पवित्र स्थान पर रखें। शेष जल को तुलसी के पौधे में या किसी पवित्र स्थान पर अर्पित करें।

आरती और प्रसाद:
पूजा के अंत में आरती करें और भगवान को प्रसाद अर्पित करें। प्रसाद सभी परिवार जनों में बांटें। इस पूजा से आपको और आपके परिवार को सुख, शांति और समृद्धि प्राप्त होगी। कुश घास को अब साल भर के लिए शुभ कार्यों में उपयोग करें।

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