Geet Sanchivani
| Author | Shree Ram Sharma Acharya |
|---|---|
| Editor | Dr Pranav Pandya |
| Publisher | unkown |
| Categories | Books |
| Languages | Hindi, Sanskrit |
| File Size | 4.91 MB |
| Source / Credit | View Original |
Description
यह पुस्तक 'गीत संजीवनी' (Geet Sanjivani) शीर्षक से एक संग्रह है, जिसमें युग ऋषि पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य के प्रवचनों के अनुसार, समाज और व्यक्ति के जीवन को प्रभावित करने वाले भजनों और गीतों का संकलन है । दिए गए विशाल दस्तावेज़ (1264 पृष्ठों) में इस संग्रह की विषय-सूची और गीतों की एक विस्तृत सूची है, जो इसके व्यापक स्वरूप को दर्शाती है। यह पुस्तक 'गीत संजीवनी' (Geet Sanjivani) का एक प्रकार है, जिसका नाम 'जीवन संजीवनी' की तरह ही जीवन को नया जीवन देने वाली औषधि के संदर्भ में रखा गया है । इसमें गायत्री परिवार के सिद्धांतों के अनुसार, जीवन को मूल्यवान और उद्देश्यपूर्ण बनाने हेतु भक्ति, ज्ञान और कर्म का सुंदर संगम है। गीतों के माध्यम से व्यक्ति को भयमुक्त, कर्मयोगी, और समाज एवं राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों के प्रति सजग करने का प्रयास किया गया है ।
पुस्तक में मुख्य रूप से निम्नलिखित विषय-वस्तुएँ हैं ।
1. वंदना एवं प्रार्थना: पुस्तक की शुरुआत गुरु वंदना, गणपति, सरस्वती, और गायत्री माता की प्रार्थनाओं से होती है। इसमें महाकाल, श्रीराम, और शिव वंदना भी शामिल हैं, जो पाठक को आध्यात्मिक ऊर्जा से जोड़ते हैं।
2. युग निर्माण के प्रेरणा गीत: ये गीत समाज में व्याप्त अंधकार, आसुरी वृत्ति, और अज्ञानता को दूर कर नवयुग (सतयुग) के उदय का आह्वान करते हैं। गीतों के माध्यम से लोगों में जागृति, स्वाभिमान, और राष्ट्र-प्रेम की भावना जगाई गई है। 'अब नवयुग की गंगोत्री से', 'अब फिर से सतयुग आएगा', और 'उठो जवान देश के' इसके प्रमुख उदाहरण हैं।
3. गुरु महिमा एवं गायत्री उपासना: गुरु को ब्रह्मा, विष्णु, महेश का स्वरूप मानकर उनके प्रति समर्पण, श्रद्धा, और कृतज्ञता व्यक्त करने वाले अनेक गीत हैं। गायत्री माता को जगत-जननी और आदिशक्ति के रूप में स्तुति की गई है।
4. सामाजिक चेतना एवं सुधार के गीत: दहेज, कुरीतियाँ, भेदभाव, नशा, और पाश्चात्य संस्कृति के दुष्प्रभावों पर तीखा व्यंग्य और उन्हें दूर करने के उपाय बताए गए हैं। स्त्री-जागरण, परिवार-व्यवस्था, और संस्कारों के महत्व पर विशेष बल दिया गया है।
5. जीवन-दर्शन एवं आत्म-विकास: सफलता, संकल्प, साधना, निष्ठा, और त्याग पर आधारित गीत व्यक्ति को आत्मनिरीक्षण और आत्म-शक्ति जगाने की प्रेरणा देते हैं।
6. विशेष पर्वों एवं अनुष्ठानों के गीत: दीपावली, महाशिवरात्रि, होली, रामनवमी, और कृष्ण जन्माष्टमी के विशेष गीत संग्रह में शामिल हैं। यज्ञ, कलश यात्रा, और विवाह संस्कार के लिए भी विशेष गीत और आरतियाँ दी गई हैं।
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